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नाबालिक लड़की से मोबाइल में अश्लील मैसेज एवं छेड़छाड़ के आरोप (पोक्सो एक्ट) में आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा गया न्यायिक रिमांड पर

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नाबालिक लडकी से छेड़छाड़ मामले में दर्री पुलिस द्वारा त्वरित कार्यवाही थाना दर्री,जिला कोरबा छ.ग.

अपराध क्रमांक 57/2022 धारा 354,506,509(ख)भा द वि.7,8 पोक्सो एक्ट.

रिपोर्टर– जावेद अली आज़ाद

कोरबा (अमर स्तम्भ)। मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि – दिनांक 19/3/22 को नाबालिग पीड़िता द्वारा लिखित रिपोर्ट दर्ज कराया कि दिनांक 13.03.2022 के पूर्व से आरोपी अखिलेश जयसवाल पिता राजेश जयसवाल निवासी राधेश्याम गली लाटा के द्वारा पीड़िता को बातचीत करने के लिए दबाव डालने, हमेशा पीड़िता से छेड़छाड़ करने एवं पीड़िता को जीने नहीं दूंगा कह कर धमकी देने तथा आरोपी अखिलेश जयसवाल से पीड़िता द्वारा बातचीत करने से इनकार कर देने से आरोपी अखिलेश जयसवाल अपने मोबाइल से पीड़िता के मोबाइल में अश्लील मैसेज भेजता है और धमकाता है।

जिसे पीड़िता द्वारा अपने परिजनों को बताने पर परिजनों के साथ थाना उपस्थित आकर एक लिखित रिपोर्ट करने पर आरोपी के विरुद्ध धारा 354, 506, 509(ख) भादवि., 7, 8 पोक्सो एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर मामला नाबालिक लड़की के संबंधित होने एवम संवन्दनशील होने से तत्काल पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल एवम वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के द्वारा आरोपी को तत्काल गिरफ्तार करने के निर्देश थाना प्रभारी दर्री विवेक शर्मा को दिए गए।एएसपी अभिषेक वर्मा एवम सीएसपी लितेश सिंह के मार्ग निर्देशन में,दर्री पुलिस के द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए 1 घंटे के भीतर आरोपी को घेराबंदी कर पकड़ा गया।

आरोपी के द्वारा इस अपराध में, इस्तेमाल किया गया मोबाइल की भी जप्ती की गई। इस प्रकरण में त्वरित कार्यवाही करने एवं आरोपी को पकड़ने में उप निरीक्षक इंद्रनाथ नायक, सहायक उपनिरीक्षक मनमोहन बैरागी, सहायक उपनिरीक्षक अनीता खेस, प्रधान आरक्षक संतोष तांडी, आरक्षक सलामुद्दीन और गजेंद्र रजवाड़े का विशेष योगदान रहा है।आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा गया है।

कोरोना कॉल से बंद ट्रेनों को चालू नही करने से आम जनता हो रही परेशान – अंकुर जैन

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चिरमिरी-अनूपपुर क्षेत्र के लोग ही नहीं अपितु देश भर से व्यापारी, विद्यार्थियों, रिश्तेदारों को आने में हो रही भारी समस्या

उपकार केसरवानी
मनेंद्रगढ़ (अमर स्तम्भ)
। भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के कोरिया जिलाध्यक्ष अंकुर जैन ने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र प्रेषित कर कोरोना काल में बंद सभी ट्रेनों को शीघ्र आरंभ किए जाने की मांग की है । पत्र में उन्होंने कहा कि इस विषय में बिलासपुर रेल मंडल से कई बार निवेदन किया गया जिसका आज तक कोई उपयुक्त जवाब नहीं दिया गया है । चिरमिरी से निकलने वाली ट्रेन क्रमश: चिरिमिरी-रीवा-चिरिमिरी 51753/51754, चिरिमिरी-चंदिया-चिरिमिरी 58221/58222, चिरिमिरी-कटनी-चिरिमिरी 51606/ 51605, चिरिमिरी-दुर्ग-चिरिमिरी 28242/ 18241, चिरिमिरी-भोपाल (स्लिप) 58220/18235 इन महत्वपूर्ण ट्रेनों को 2 साल की अवधि बीत जाने के बाद भी आज तक चालू ना किया जाना क्षेत्र की आम जनता के लिए आवागमन में घोर परेशानी का कारण बना हुआ है इसमें तत्काल कारवाही अपेक्षित है।

चिरमिरी से इन ट्रेनों का संचालन बंद होने से भोपाल,जबलपुर,रीवा, शहडोल,कटनी से डायरेक्ट संपर्क टूट गया है, जिससे क्षेत्र के लोगों को ट्रेन बदल-बदल कर घंटो इंतजार करके विलंब से यात्रा पूर्ण करना पड़ रहा है । जिससे समय और आर्थिक रूप से अतिरिक्त भार पड़ गया है एक साथ इतनी ट्रेन बंद करने से लगातार आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शीघ्र ही इन ट्रेनों को अगर शुरू नहीं किया जाता है तो बहुत जल्द जन आंदोलन करने के लिए क्षेत्र की जनता बाध्य होगी।

सोशल मीडिया साइट ट्विटर में आया डीआरएम बिलासपुर का जवाब

भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष अंकुर जैन के द्वारा टि्वटर में भी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र की कॉपी ट्वीट किया गया जिस पर डीआरएम बिलासपुर कमेंट करके जानकारी दी गई कि – प्राप्त प्रस्तावों को पहले ही रेल मंत्रालय को भेज दिया गया है और एक बार अधिसूचना प्राप्त होने के बाद इसे सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जाएगा।

सरस्वती योजना के तहत 9 वीं कक्षा की बालिकाओं को किया गया सायकल वितरण

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छुरा (अमर स्तम्भ)।:- राज्य सरकार की महती योजना सरस्वती सायकल योजना के तहत छूरा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत दादरगांव पुराना के हाई स्कूल में 27 बालिकाओ को सरस्वती सायकल वितरण किया गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि के रुप मे ग्राम पंचायत दादरगांव के सरपंच आमना दीवान,ग्राम पंचायत दादरगांव के उपसरपंच सैय्यद जब्बार अली व पंचायत परिवार व शाला के परिवार के आतिथ्य में सम्पन्न हूआ। शासन के योजना के तहत सरस्वती सायकल योजना का लाभ कक्षा 9 वीं कक्षा के कन्या छात्राओं को मिलना था। इसी कड़ी में आज हाई स्कूल दादरगांव पुराना में सरस्वती सायकल योजना के तहत 27 बालिकाओ को सरस्वती सायकल योजना के तहत सायकल वितरण किया गया। इस अवसर पर उपसरपंच जब्बार अली ने कहा कि शासन द्वारा पदत्त सायकल छात्राओं के लिए कारगर साबित होगा अब बालिकाए उन्हें मिली सायकल से स्कूल आयेंगे। वही स्कूल प्राचार्य ऋषि कुमार साहू ने कहा कि सायकल का वितरण आज गांव के सरपंच उपसरपंच व गणमान्य नागरिक के आतिथ्य में किया गया सायकल मिलने से बच्चे काफी उत्साहित है इस अवसर पर सरपंच आमना दीवान,उपसरपंच जब्बार अली, पंच नन्दनी चन्द्राकर, गीता ध्रुव,अंजली दीवान, वेदबाई निषाद,टीकाराम,सलीम खान,गौरी बाई, बलराम निषाद, शिक्षक सन्तराम दीवान,सीमा गायकवाड़, निहारिका सेन, उपस्थित थे।

सुकमा पुलिस नक्सलगढ में कर रही सराहनीय कार्य

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संजय सिंह भदौरिया
सुकमा (अमर स्तम्भ)। सुकमा जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में ग्रामीणों को विकास एवं उन्नति के दिशा व सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से पुलिस के द्वारा लगातार कैम्प स्थापित कर ग्रामीणों का सहयोग किया जा रहा है इसी कड़ी में पुलिस अधीक्षक सुकमा सुनील शर्मा ,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आंजनेय, ओम चंदेल के मार्गदर्शन एवम अनुविभागीय अधिकारी पुलिस जगरगुंडा विजय राजपूत उपपुलिस अधीक्षक अमित देवांगन के नेतृत्व में 20मार्च को ग्राम भटपाड के पोडियाम सोमा पिता पोडियम एरा उम्र 30 वर्ष जो इमली पेड़ से गिर कर चोटिल हो गया था व उसके परिजन उसे साइकिल में लेकर कैंप एल्मागुंडा तक लेकर लाए जिसके बाद कैंप में उसका प्राथमिक उपचार किया गया तथा परिजनों को भोजन भी कराया गया बाद में चिंतागुफा से एम्बुलेंस बुलवाकर बेहतर उपचार हेतु चिंतागुफा से सुकमा परिजनों के साथ रवाना किया गयाl जहाँ उसे उचित चिकित्सा का लाभ मिल सका।

महासमुंद के युवा एएसआई की हत्या प्रदेश में पुलिस ही सुरक्षित नहीं है जनता का क्या होगा -दीपिका

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संजय सिंह भदौरिया
सुकमा (अमर स्तम्भ)। छत्तीसगढ़ के महासमुंद में शनिवार देर रात साइबर सेल के युवा एएसआई विकास शर्मा की हत्या कर दी इस पर भाजयूमो प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता दीपिकाशोरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर प्रदेश में पूरी तरह कानून व्यवस्था ठप्प होने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक युवा एएसआई  की हत्या बदमाशों ने उनके ही सरकारी आवास के सामने कर दी जिससे जनता के बीच बहुत ही गलत संदेश गया है जब इस प्रदेश में पुलिस ही सुरक्षित नहीं है तो आम जन की दशा क्या होगी अंदाजा लगाया जा सकता है उन्होंने कहा कि बदमाश उनके सरकारी क्वार्टर के बाहर गालियां दे रहे थे। और एक योग्य सिपाही की तरह विकास भी उन्हें समझाने के लिए गए थे परन्तु एक सिपाही की उपस्थित से भी बदमाशो को कोई फर्क नहीं पड़ा व उनकी ही हत्या कर दी।

कोतवाली क्षेत्र में बदमाशों ने  की घटना

दीपिका ने बताया कि विकास के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। वह अपनी मां के साथ ही  कोतवाली क्षेत्र स्थित पंचशील क्लब के सामने ही सरकारी क्वार्टर में रहते थे। विकास की मां भी सरकारी कर्मचारी थी। रिटायरमेंट के बाद दोनों साथ में यहीं रहते थे। शनिवार की रात करीब 10.30 बजे कुछ लोग उनके घर के पास खड़े होकर झगड़ा और गाली-गलौज कर रहे थे। शोर सुनकर विकास बाहर निकले और उन्हें समझाने का प्रयास किया परन्तु कोतवाली क्षेत्र होने के बावजूद बदमाशों के हौसले बुलंद थे पुलिस प्रशासन की किसी प्रकार की भय नहीं थी व एक योग्य सिपाही की हत्या हो गई।

पुलिस को समर्पित जीवन नहीं किया विवाह

दीपिका ने बताया की युवा एएसआई विकास के बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने ही उन्हें पढ़ाया-लिखाया। पुलिस ड्यूटी के प्रति विकास का इतना ज्यादा समर्पण था कि विकास ने शादी नहीं करने का भी फैसला किया था।एक योग्य सिपाही की हत्या की मैं निंदा करती हूं साथ ही मेरी व पूरी युवामोर्चा की संवेदनाएं विकास के परिवार के साथ हैं,मैं मीडिया के माध्यम से विकास के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा देने की अपील करती हूं

विदित हो कि सिपाही के रूप में हुए थे भर्ती, पदोन्नति पाकर एएसआई बने,विकास  छात्र जीवन से बॉक्सिंग के खिलाड़ी रहे। उन्होंने बेहतर खेल से कई मेडल अपने नाम किया। पुलिस विभाग में सिपाही के रूप में भर्ती हुए। फिर अच्छे प्रदर्शन के चलते हेड कांस्टेबल और उसके बाद एएसआई बने थे। बाद में क्राइम ब्रांच में सेवा देते रहे जहां उन्होंने बहुत ही उम्दा कार्य किया था। हाल ही में उन्हें नारकोटिक्स सेल में भेजा गया था। विकास स्नेक केचर के रूप में भी मशहूर थे।कई घरों से जहरीले सर्प को पकड़कर विकास ने जंगल मे छोड़ा था।

10 दिवस के भीतर सिविल लाईन थाना क्षेत्र से अपहृत 03 वर्षीय मासूम को उत्तराखण्ड के देहरादून से किया गया सकुशल दस्तयाब, प्रकरण मंे 02 अंतर्राज्यीय आरोपी गिरफ्तार 

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रायपुर (अमर स्तम्भ) – प्रार्थी बजरंग सोनवानी ने थाना सिविल लाईन में रिपोर्ट दर्ज कराया कि दिनांक 09.03.22 को वह अपने 03 वर्षीय पुत्र सुभाष सोनवानी के साथ रात्रि में राजेन्द्र नगर स्थित बूढ़ी माई मंदिर के पास रोड़ किनारे झोपडी में सोया था कि किसी अज्ञात आरोपी द्वारा उसके 03 वर्षीय पुत्र सुभाष सोनवानी का अपहरण कर ले गया। जिस पर अज्ञात आरोपी के विरूद्ध थाना सिविल लाईन में अपराध क्रमांक 153/22 धारा 363 भादवि. का अपराध पंजीबद्ध किया गया।

  03 वर्षीय मासूम की अपहरण की घटना की गंभीरता को देखते हुये वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  प्रशांत अग्रवाल द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर तारकेश्वर पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध  अभिषेक माहेश्वरी, नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाईन  वीरेन्द्र चतुर्वेदी, प्रभारी एण्टी क्राईम एवं सायबर यूनिट  गिरीश तिवारी एवं थाना प्रभारी सिविल लाईन  सत्यप्रकाश तिवारी को अज्ञात आरोपी की पतासाजी करते हुए बच्चे को सकुशल दस्तयाब करने के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एण्टी क्राईम एवं सायबर यूनिट तथा थाना सिविल लाईन पुलिस की एक विशेष टीम का गठन कर अज्ञात आरोपी एवं अपहृत की पतासाजी करना प्रारंभ किया गया।

अज्ञात आरोपी की गिरफ्तारी एवं अपहृत को छुड़ाने में लगी विशेष टीम द्वारा सर्वप्रथम घटना स्थल जाकर निरीक्षण किया गया एवं अलग – अलग कार्य हेतु टीमों का अलग – अलग गठन कर कार्य विभाजन किया गया। अलग – अलग टीमें बनाकर टीमों को सी.सी.टी.व्ही. फुटेज संग्रहण, तकनीकी विश्लेषण, अपहृत के संबंध में स्थानीय जानकारी एकत्रित करने सहित अन्य कार्यो में लगाया गया। सी.सी.टी.व्ही. फुटेज संग्रहण में लगी टीम को घटना स्थल पर एक दोपहिया वाहन में संदिग्ध का फुटेज प्राप्त होने पर वाहन के जाने वाले मार्गो को फॉलो करते हुए मार्ग मंे लगे सी.सी.टी.व्ही. कैमरों के फुटेजों को लगातार खंगालते हुए 1,000 से भी अधिक सी.सी.टी.व्ही. कैमरों के फुटेजों का अवलोकन करने के साथ ही रेलवे स्टेशन व टोल प्लाजा मंे लगे कैमरों के फुटेजों का भी अवलोकन किया गया, जिसमें अज्ञात आरोपी के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त हुए। इसके साथ ही तकनीकी विश्लेषण करने वाली टीम को भी विश्लेषण के दौरान अज्ञात आरोपी के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई, जिस पर फुटेज एवं तकनीकी विश्लेषण दोनों का मिलान करते हुए अंततः आरोपी की उपस्थिति उत्तराखण्ड़ के देहरादून में होना पाया गया।

आरोपी की उपस्थिति देहरादून में होना पाये जाने पर एण्टी क्राईम एवं सायबर यूनिट के प्रभारी निरीक्षक गिरीश तिवारी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम को देहरादून रवाना किया गया। टीम के सदस्य देहरादून पहुंचकर आरोपी की पतासाजी करना प्रारंभ किये। टीम के सदस्यों द्वारा स्थानीय पुलिस व स्थानीय लोगों को बिना भनक लगे अपने कार्य को अंजाम दिया जाने लगा तथा लगातार 02 दिनों तक देहरादून में कैम्प करते हुए अंततः प्रकरण के मुख्य आरोपी ईरफान अहमद को गिरफ्तार कर अपहृत मासूम सुभाष सोनवानी को सकुशल दस्तयाब किया गया।

  पूछताछ में गिरफ्तार मुख्य आरोपी ईरफान अहमद ने बताया कि देहरादून निवासी सलीम अहमद की तीन पुत्रीयां थीं तथा सलीम अहमद की पत्नि को डॉक्टर ने अगला बच्चा नहीं हो पाना बताया था परंतु सलीम अहमद एक लड़का चाहता था। जिस हेतु उसने अपने परिचितों से कह रखा था कि जो भी उसको लड़का लाकर देगा उसका वह जितना पैसा मांगेगा देगा। ईरफान अहमद सलीम का रिश्ते में साला लगता था जिसे पैसे की आवश्यकता होने पर उसने अपनी पत्नि शबाना परवीन व साथी शेरखान उर्फ गुड्डू निवासी रविग्राम तेलीबांधा रायपुर के साथ मिलकर रायपुर से किसी छोटे बच्चे की अपहरण करने की योजना बना डालीं। योजना के अनुसार तीनों रायपुर शहर में घुम – घुम कर बच्चे की तलाश करने लगे, इसी दौरान तीनों ने थाना सिविल लाईन क्षेत्रांतर्गत बूढ़ी माई मंदिर के पास झोपड़ी बनाकर रहने वाले लोगों के बच्चे को टारगेट किया तथा कुछ दिनों तक लगातार उस स्थान पर जाकर उस बच्चे को चुने जिसका अपहरण करना था तथा दिनांक घटना को मौका पाकर रात्रि में आरोपी ईरफान अहमद एवं शेरखान उर्फ गुड्डू मोटर सायकल में जाकर सोते हालत में मासूम सुभाष सोनवानी का अपहरण कर लिये। अपहरण पश्चात् आरोपियों ने बच्चे को ईरफान अहमद के निवास मंदिर हसौद ले गये। योजना के अनुसार ईरफान अहमद ने पूर्व से ही अपना, अपनी पत्नि व पुत्री का ट्रेन में सहारनपुर व देहरादून जाने का टिकट बुक करा लिया था तथा आरोपी ईरफान अहमद, अपनी पत्नि व पुत्री के साथ अपहृत सुभाष सोनवानी को ट्रेन से लेकर उ.प्र. के सहारनपुर गया जहां उसने अपहृत को आरोपी सलीम के सुपुर्द किया तथा सलीम से 50,000/- रूपये लिया इसके पश्चात् ईरफान अहमद अपने परिवार के साथ देहरादून चला गया तथा आरोपी सलीम भी अपहृत को लेकर देहरादून चला गया।

प्रकरण में मुख्य आरोपी ईरफान अहमद तथा सलीम अहमद को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से घटना से संबंधित नगदी 5,000/- रूपये, 02 नग मोबाईल फोन, घटना के दौरान आरोपी ईरफान अहमद द्वारा पहने गये शर्ट व टोपी तथा ट्रेन का टिकट जप्त कर आरोपियों के विरूद्ध अग्रिम कार्यवाही की जा रहीं है।

आरोपी शेरखान उर्फ गुड्डू घटना कारित करने पश्चात् रायपुर में ही रूक गया था जो वर्तमान में अपने परिवार सहित रायपुर से कहीं अन्यत्र फरार है, जिसकी पतासाजी कर गिरफ्तार करने के हर संभव प्रयास किये जा रहे है। इसके साथ ही घटना में संलिप्त जो भी नाम सामने आएंगे उनकी भी पतासाजी कर गिरफ्तारी की जाएगी।

आरोपी ईरफान अहमद मुख्यतः देहरादून का निवासी है जो विगत 20 – 25 वर्षो से रायपुर के श्याम नगर तेलीबांधा में किराए के मकान में निवासरत था जो घटना कारित करने के उद्देश्य से वर्तमान में मंदिर हसौद में किराए के मकान में रह रहा था तथा घटना का मास्टर माइंड व मुख्य आरोपी है। आरोपी वर्ष 2019 में थाना पंडरी, डी.डी. नगर, न्यू राजेन्द्र नगर, कबीर नगर एवं आमानाका से धारा 457, 380 भादवि. के प्रकरण में जेल निरूद्ध रह चुका है जिसके कब्जे से उक्त प्रकरणों में सोने, चांदी के जेवरात एवं नगदी रकम सहित कुल लगभग 20 लाख रूपये का मशरूका जप्त किया गया था। इसके साथ ही आरोपी देहरादून (उत्तराखण्ड) में भी चोरी के प्रकरण में जेल निरूद्ध रह चुका है।

गिरफ्तार आरोपी

01. ईरफान अहमद पिता बहार अहमद उम्र 40 साल निवासी देहरादून हाल पता गायत्री मंदिर के पास मंदिर हसौद रायपुर।

02. सलीम अहमद पिता शब्बीर अहमद उम्र 49 साल निवासी देहरादून थाना कोतवाली जिला देहरादून (उत्तराखण्ड)।

कार्यवाही में एण्टी क्राईम एवं सायबर यूनिट से निरीक्षक गिरीश तिवारी, उपनिरीक्षक अमित कश्यप, थाना सिविल लाईन से उपनिरीक्षक मनीष यादव, एण्टी क्राईम एवं सायबर यूनिट से सउनि. किशोर सेठ, प्र.आर. सरफराज चिश्ती, संदीप दीक्षित, राधाकांत पाण्डेय, महेन्द्र राजपूत, मोह0 सुल्तान, कृपासिंधु पटेल, चिंतामणी साहू, आर. प्रमोद बेहरा, रवि तिवारी, मोह0 राजिक खान, दिलीप जांगडे, नितेश सिंह राजपूत, उपेन्द्र यादव, विकास क्षत्री, वीरेन्द्र भार्गव, सुरेश देशमुख म.आर. बबीता देवांगन की महत्वपूर्ण भूमिंका रहीं।

( नवीन विकासखंड) जिला प्रशासन ने गोहरापदर के नाम जारी किया पत्र ,,,

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गरियाबंद/ मैनपुर (अमर स्तम्भ)।  गरियाबंद जिले मे एक और तहसील की स्थापना होने जा रहा 
राज्य सरकार ने मैनपुर को विभाजीत कर एक नवीन विकास खंड गठन की स्वीकृति दे दी है

गरियाबंद जिला प्रशासन के द्वारा दिनांक 1 , 02 , 2022 को SDM मैनपुर ने नाम एक पत्र जारी कर  ग्राम गोहरापदर का नक्शा ट्रेसिन्ग कर मंगवाया गया है

*अमलीपदर के नेता ,,, और गोहरापदर के नेता मुख्यालय के लिए लगा रहे थे लगातार  जोर*,,,

तहसील निर्माण क्षेत्र की बहु प्रतीक्षित मांग थी
भाजपा शासन ने भी इसकी मांग जोरो पर थी परन्तु इस मांग को भूपेश बघेल सरकार ने पूरा किया
पिछले वर्ष घोषणा के बाद से ही मुख्यालय स्थापना को लेकर , अमलीपदर , गोहरापदर दोनो जगह के नेताओं के बीच में लगातार जोर आजमाइश शुरू हो गया था।

इस में गोहरापदर क्षेत्र के कद्दावर नेता कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष तपेश्वर ठाकुर के नेतृत्व में क्षेत्र के कांग्रेसी नेताओं , सरपंचों ने मुख्यालय गोहरापदर की मांग को लेकर ,, जिला मुख्यालय से राजधानी तक पहुंचकर मंत्रियों के समक्ष अपनी मांग रखी थी

जिला प्रशासन से जारी पत्र से स्पष्ट हो गया है कि मुख्यालय गोहरापदर में ही बनने जा रहा है

द कश्मीर फाइल्स, फिल्म पर आंसू बहाने वाले लोगों को दिखाई नहीं दी छत्तीसगढ़ दंतेवाड़ा के आदिवासियों का नरसंहार.

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रिपोर्टर– जावेद अली आजाद

जिला कोरबा ब्यूरो(अमर स्तम्भ)। विवेक अग्निहोत्री निर्देशित फिल्म “द कश्मीर फाइल्स” फिल्म को जनता का भारी समर्थन मिल रहा है।फिल्म की शुरुआत भले ही बॉक्स ऑफिस पर कमजोर हुई थी,लेकिन दूसरे दिन से ही फिल्म के साथ देश की जनता जुड़ गई और फिर फिल्म धीरे धीरे तेजी से कमाई करने लगी।कश्मीरी पंडितों के साथ हुई घटना को बयान करती ये फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आ रही है।आम दर्शक के अलावा भी कई सेलेब्स इस फिल्म की तारीफ कर चुके हैं।

फिल्म के कलेक्शन को लेकर विवेक अग्निहोत्री ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट किया है।इस पोस्ट में उन्होंने बताया है कि कश्मीर फाइल्स ने 7 दिन में ही कुल 106.80 करोड़ रुपये की कमाई की है।बता दें कि फिल्म आने वाले दिनों में और भी तगड़ी कमाई कर चुकी है।फिल्म को वीकेंड का फायदा मिल सकता है।लगातार फिल्म को दर्शकों का प्यार मिला है फिल्म लगातार कमाई का रिकॉर्ड तोड़ा।

भारत में अनेकों प्रकार के राजनीति पार्टियां हैं पार्टियों के द्वारा तरह-तरह के राजनीति हथकंडे अपनाए जाते रहे हैं कभी धर्म के नाम पर कभी वोट के नाम पर इसी प्रकार अब फिल्मों में भी धर्म के नाम पर अभिनेताओं के द्वारा फिल्मी स्टाइल पर धर्म की राजनीति करते हुए लोगों को फिल्म के माध्यम से संदेश दिया जा रहा है। भारत देश धर्मनिरपेक्ष जातियों का समूह है। सभी को समानता से जीने का अधिकार है। परंतु बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि अभी भी धर्म के नाम पर कई तरह के फिल्म बनाए जा रहे हैं। विशेष रुप से कश्मीरी पंडितों को लेकर फिल्म बनाई गई है। अगर फिल्में बनानी है तो छत्तीसगढ़ राज्य के सुकमा दंतेवाड़ा आदिवासियों का जो नरसंहार किया गया उस पर क्यों अब तक फिल्म नहीं बनाई गई?

जाहिर सी बात है– अभी भी निम्न स्तर के और नीचे जातियों का खंडन किया जा रहा है। ऊंच-नीच की जाति की गणना करते हुए राजनीति की जा रही है इसी प्रकार सत्ता में बैठे राजनेताओं के द्वारा और फिल्म से जुड़े कुछ अभिनेताओं के द्वारा धर्म के नाम पर अपनी रोटी सेका जा रहा है और इसी के माध्यम से लोगों के दिलों में धर्म प्रचार को लेकर एक षड्यंत्र रचते हुए आमजनों से आने वाले समय में वोट बैंक बनाया रहा है।

द कश्मीर फाइल्स,फिल्म पर आंसू बहाने वाले लोगों को दिखाई नहीं दी छत्तीसगढ़ दंतेवाड़ा के आदिवासियों का नरसंहार.

सुकुमा के सिलगेर में सेना कैम्पों के लगने का शान्ति पूर्वक विरोध कर रहे आदिवासियों पर जवानों ने गोली चला दी, जिसमें 3 आदिवासियों की मौत हो गयी और 18 घायल हो गये।

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में सिलेगर में सीआरपीएफ कैम्प लगने का तीन दिन से विरोध कर रहे ग्रामीण आदिवासियों पर जवानों ने बीते 17 मई को गोली चला दी। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएँ और नाबालिग़ भी शामिल थे। इस गोलीकांड में तीन आदिवासियों की मौत हो गयी, जबकि 18 घायल हो गये। स्थानीय लोग घायलों की संख्या दो दर्ज़न से अधिक बता रहे हैं। हद तो इस बात की है कि पहले पुलिस आईजी ने मारे गये आदिवासियों को नक्सली करार दे डाला, तो दूसरी ओर प्रदेश सरकार द्वारा मृतकों के आश्रितों को मुआवज़े की पेशकश भी की गयी। सवाल यह भी उठ रहा है कि 5000 लोगों के बीच में यदि तीन माओवादी भी हों, तो क्या पुलिस उन तीनों को बिना निशाना चूके मार सकती है?

यह सर्वविदित है कि छत्तीसगढ़ में लम्बे समय से आदिवासियों के साथ अत्याचार हो रहा है। इन लोगों की शिकायतें भी थानों में नहीं सुनी जातीं और जब मर्ज़ी इन्हें पुलिस, सीआरपीएफ के जवान और वास्तविक नक्सली रौंदकर चले जाते हैं। सदियों से अत्याचार के शिकार आदिवासियों की ख़ता सिर्फ इतनी है कि ये लोग सीधे-सादे हैं और जल-जंगल-ज़मीन को बचाने की कोशिश में लगे रहते हैं। अब तक सैकड़ों आदिवासियों को बिना कारण के मौत के घाट उतारा जा चुका है। ऐसे कई मामले सामने आये हैं, जिनमें पुलिस या सीआरपीएफ के जवानों ने आदिवासियों को मौत के घाट उतार दिया। मरने के बाद उन्हें नक्सली करार दे दिया गया और बाद में अदालतों में यह सिद्ध हुआ है कि मार दिये गये लोग।

भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग

ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह सीआरपीएफ कैम्प बनाया जा रहा है, ताकि आदिवासियों की ज़मीन आसानी से छीनी जा सके। सीआरपीएफ कैप का विरोध रोकने के लिए ही आदिवासियों की हत्याएँ की गयी हैं।

लोगों का विरोध देखकर पुलिस और प्रशासन को आदिवासी प्रतिनिधियों से 23 मई को बातचीत भी करनी पड़ी, लेकिन न तो मृतकों के परिजनों को कोई बड़ा राहत पैकेज देने की घोषणा की गयी और न ही सीआरपीएफ कैम्पों को हटाने को लेकर कोई आश्वासन दिया गया। जब आदिवासियों पर जवानों द्वारा गोलियाँ दाग़ने का मामला काफ़ी तूल पकड़ा, तब मरने वालों को 10-10 हज़ार रुपये राहत के तौर पर देने की घोषणा की गयी। आदिवासियों ने रुपये लेने से साफ इनकार कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि जब मारे गये लोग नक्सली थे, तो उन्हें राहत पैकेज क्यों दिया गया, जबकि दूसरा सवाल यह है कि क्या आदिवासियों के जान की क़ीमत सिर्फ 10 हज़ार रुपये है।

आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन

एक साल के अन्दर बस्तर सम्भाग में सीआरपीएफ के 30 से अधिक कैम्प लग चुके हैं, जबकि यह सम्भाग पाँचवीं अनुसूची में आता है और यहाँ कैम्प लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। पेसा एक्ट के अनुसार, बस्तर सम्भाग में ग्रामसभा की अनुमति लिए बग़ैर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके यहाँ पिछले एक साल से सीआरपीएफ के कैम्प बनाये जा रहे हैं। जब आदिवासी सुरक्षा बलों के कैम्पों का विरोध कर रहे हैं, तो उन पर सीधे लाठियाँ और गोलियाँ बरसायी जा रही हैं और उनकी हत्या की जा रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा इस तरह की बहुत सारी घटनाएँ पहले भी की जा चुकी हैं। सन् 2012 में सीआरपीएफ ने बस्तर सम्भाग के ही सारकेगुड़ा में 17 निर्दोष आदिवासियों को गोलियों से भून दिया था, जिसमें नौ छोटे बच्चे थे। ये सभी मृतक बीज पंडूम त्यौहार मना रहे थे। इस मामले में भी मारे गये लोगों को पुलिस ने माओवादी कहा था। लेकिन जब जाँच आयोग की रिपोर्ट आयी, तो उसने घोषित किया कि मारे गये लोग निर्दोष आदिवासी थे। जाँच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद से आज तक किसी के ख़िलाफ़ कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है।

रमन सिंह की राह पर भूपेश बघेल

संविधान के अनुच्छेद-244(1) पाँचवीं अनुसूची से अधिसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं की भूमिका को अनदेखा कर छत्तीसगढ़ में आदिवासियों पर शोषण, अत्याचार किया जा रहा है। पाँचवीं अनुसूची के धारा-4(3)(क, ख, ग) अधिसूचित क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में राष्ट्रपति एवं राज्यपाल की भूमिका को नज़रअंदाज़कर, ग्रामसभाओं की भूमिकाओं को बाईपास कर राज्य सरकारें मनमाने फ़ैसले ले रही हैं, जिसके कारण अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासनिक और कारपोरेट की दख़लअंदाज़ी बढऩे से आदिवासियों के अस्तित्व, अस्मिता, पहचान और उनकी सांस्कृतिक विरासत के ख़त्म होने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है। बड़े पैमाने पर अनुसूचित क्षेत्रों में खनन, कारपोरेट, वन अभ्यारण्य इत्यादि के नाम पर आदिवासियों की ज़मीनें छीनी जा रही हैं।

इस मामले पर भी आदिवासियों पर आधारित “द दंतेवाड़ा फाइल्स” फिल्म अभी तक क्यों नहीं बन पाई? क्या छत्तीसगढ़ की जनता इस मामले पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया? क्या दी कश्मीर फाइल्स पर आंसू बहाने वाले लोगों को दंतेवाड़ा आदिवासी निवासियों की दुख दर्द एवं उनकी पीड़ा और उनके साथ हुए नरसंहार सोशल मीडिया पर दिखाई नहीं दिए? परंतु यह सब मामले को दरकिनार करते हुए सत्ता में बैठे अधिकारियों एवं नेताओं के द्वारा और समाज में गलत संदेश पहुंचाने वाले कुछ फिल्म के अभिनेताओं के द्वारा धर्म की राजनीति के गलियारों से होते हुए दंगे करवाने और लोगों के आपसी भाईचारे एवं सौहार्द को मिटाने में लगे हुए हैं।

नशे की हालत में लापरवाही पूर्वक बाइक सवार युवक ने युवती की स्कूटी को मारी ठोकर, इलाज के दौरान युवती की आकस्मिक मौत

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रिपोर्ट– जावेद अली आज़ाद

कोरबा (अमर स्तम्भ)। रविशंकर शुक्ल नगर की ओर से तेज रफ्तार से आ रहा पल्सर बाईक चालक युवक के वाहन क्रमांक CG 12 BE 8649 के चालक लापरवाही पूर्वक नशे मे धुत होकर बाइक सवार दो युवक ने नियंत्रण खोकर स्कूटी सवार युवती की वाहन क्रमांक CG 12 AN 7949 को ठोकर मार दिया। वही घटनास्थल पर मौके का फायदा उठाकर पल्सर बाइक चालक युवक मौके से फरार हो गया।

भागते हुए बाईक मे पीछे बैठे एक युवक को स्थानी लोगो ने धर दबोचा। घटना घटित होने के उपरांत स्थानीय लोगो की मदद से युवती को निजी अस्पताल मे भर्ती कराया गया था, राजेन्द्र प्रसाद नगर निवासी युवती सेजल राखोडें की निजी अस्पताल में उपचार के दौरान देर रात निधन हो गया है। मामले की जांच कर पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही है। वही फरार आरोपी की पतासाजी की जा रही है।

दो शराबियों के झगड़े में ASI की चली गई जान, जाने क्या है पूरा मामला?

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दो शराबियों के झगड़े में बीचबचाव करने गए ASI की चली गई जान महासमुंद,

दो शराबियों के झगड़े का बीच-बचाव करते एएसआई की चली गई जान

महासमुंद (अमर स्तंभ)। प्रदेश में बीते दिनों होली के बाद कई ऐसी वारदात सामने आई है जिसमे या तो कोई दो व्यक्तियों के बीच विवाद रोकने पहुंचा और खुद मौत का शिकार हो गया। ऐसा ही एक मामला महासमुंद जिले से निकल के सामने आया है।

आपको बता दे शनिवार रात साढ़े आठ बजे एएसआई विकास शर्मा अपने घर के पास टहल रहे थे, तभी कुछ लोग शराब के नशे में आपस मे विवाद कर रहे थे। उनका बीचबचाव करते शर्मा गिर पड़े, बेहोशी की हालत में लोगों ने उन्हें पास के ही निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया।
छत्‍तीसगढ़ के महासमुंद साइबर सेल में पदस्थ एएसआई विकास शर्मा का निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। एसपी विवेक शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में चल रही उपचार एवं इलाज के दौरान निधन हुआ।

महासमुंद निवासी 41 वर्षीय विकास शर्मा छात्र जीवन से बॉक्सिंग के खिलाड़ी रहे। उन्होंने अपने बेहतर खेल से कई मेडल अपने नाम किया। पुलिस विभाग में आरक्षक के रूप में भर्ती पर प्रशिक्षण केंद्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन से उन्हें प्रधान आरक्षक की पदोन्नति मिली। बाद से वे क्राइम ब्रांच, साइबर सेल में सेवा देते रहे।

अधिकारियों ने कहीं ये बात

एसपी शुक्ला ने बताया कि घटना के बाद से पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही है। वास्तव में घटना कैसे हुई पता लगाया जा रहा है। एसपी ने कहा कि एएसआई के शरीर पर चोट का निशान नहीं है। शव का पीएम कराया जाएगा।

वे सभी टास्क पर अपने अधिकारियों के विश्वास पर खरा उतरते रहे। एक टास्क में खुद वे एक सिपाही व एक नगर सैनिक के साथ महानगर दिल्ली जाकर चिटफंड कंपनी एचबीएन के डायरेक्टर अमरिंदर सिंह को दिल्ली से ही अपने कौशल से पकड़कर लाया था। तब तत्कालीन आईजी रायपुर रेंज जीपी सिंह ने विकास सहित तीन जवानों को इस मामले में विशेष पारितोषिक देकर पदोन्नति दी। इसके बाद विकास एएसआई पद पर सेवा देते रहे। विकास स्नेक कैचर के रूप में भी ख्यात रहे। लोगों के घरों में निकले विषैले सांप को आसानी से पकड़कर जंगल छोड़ने में विकास को महारत हासिल थी। ऐसा कार्य कर उन्होंने कई लोगों की सहायता की है।

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